Хинди Правосудие
09.09.2026 Читать источник
Иलाбадский суд отменил уголовное дело против владельца квартиры после смерти студента
Илабадский высший суд постановил, что владелец арендованного жилья не несет уголовной ответственности за случайную смерть жильца без доказательств его прямой халатности. Судья отменил дело против арендодателя, указав, что владение недвижимостью само по себе не является основанием для привлечения к ответственности за гибель человека.
Перевод ИИ
Текст статьи доступен на языке оригинала.
Нажмите кнопку «Перевести статью» выше, чтобы сгенерировать перевод с помощью ИИ.
Оригинальный контент
क्या किराये के घर में किसी हादसे में मौत के लिए मकान मालिक जिम्मेदार? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया अहम फैसला
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किराये के मकान में यदि दुर्घटनावश कोई मौत हो जाती है तो इसके लिए मकान मालिक को आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। इसके लिए अभियोजन को मकान मालिक की ऐसी विशिष्ट लापरवाही या चूक का प्रथम दृष्टया सबूत देना होगा, जिसका मौत से सीधा और निकट संबंध हो। यह टिप्पणी जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने की। उन्होंने छात्र की मौत के मामले में याचिकाकर्ता मकान मालिक अवधेश सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। मकान मालिक की लापरवाही का कोई सबूत नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव एक अहम फैसला देते हुए स्पष्ट किया है कि केवल प्रॉपर्टी का मालिक होने मात्र से किसी दुर्घटनावश (एक्सीडेंटल) मौत के लिए मकान मालिक पर आपराधिक जिम्मेदारी (Criminal Liability) नहीं डाली जा सकती। कोर्ट ने कहा कि जब तक अभियोजन पक्ष के सबूतों से मकान मालिक की ओर से कोई कानूनी रूप से साबित होने वाली लापरवाही या चूक (Negligence) का पता न चले, तब तक उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। बाथरूम में मिला था छात्र का शव कानपुर शहर के काकादेव थाने में याचिकाकर्ता अवधेश सिंह के खिलाफ मृत छात्र के पिता संतोष कुमार गुप्ता ने एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि छात्र आठ महीने से सिंह के मकान में किराये पर रहकर आईआईटी की तैयारी कर रहा था। एक दिसंबर 2025 को उन्हें छात्र की मौत की सूचना मिली। जब वे मौके पर पहुंचे तो उन्हें छात्र का शव मकान के बाथरूम में मिला। कार्बन मोनोऑक्साइड गैस से हुई थी छात्र की मौत छात्र के परिवार ने आरोप लगया था कि बाथरूम में गैस गीजर लगा था और पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था। उन्होंने आशंका जताई कि कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण छात्र की मौत हुई। जांच के बाद पुलिस ने मकान मालिक के खिलाफ लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने सात सितंबर 2025 को ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसे 15 नवंबर 2025 को संज्ञान में लिया था। ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान/समन आदेश जारी किया तो याचिकाकर्ता सिंह ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। याचिकाकर्ता अवधेश सिंह के वकील ने अदालत में कहा कि रिकार्ड पर मकान मालिक की ओर से कोई घोर लापरवाही नहीं की गई है। दूसरी तरफ सरकारी वकील ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मौत कार्बन मोनोआक्साइड से हुई थी। हाईकोर्ट ने केस की पूरी कार्यवाही रद्द की हाईकोर्ट ने कहा कि छात्र की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन मकान में केवल मौत होने से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-106 के तहत मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि गीजर सुरक्षा मानकों के खिलाफ लगाया गया था, वह खराब था। यह प्रमाण नहीं है कि गीजर खराब होने की जानकारी मकान मालिक को थी, या पहले कभी लीकेज की शिकायत के बाद भी उसने उसे ठीक नहीं कराया था। केवल अंदाज पर आपराधिक केस नहीं चल सकता। मकान के स्वामित्व से आपराधिक जिम्मेदारी नहीं बनती। हाईकोर्ट ने केस की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।
Аналитика ИИ и парсинга
Технические детали обнаружения, сопоставления и связывания статьи
Поисковый запрос
«Илабадский суд отменил дело владельца квартиры смерть студента»
Запрос, сгенерированный ИИ для поиска статьи в веб-источниках
Связанные результаты поиска
База судебных дел России «Репутация» собирает судебные дела всех регионов России, из судов общей юрисдикции и арбитража, в одну картотеку с удобным поиском. Дело можно найти по ФИО или ИНН участника, по номеру или по ...