Хинди Политика
13.08.2026 Читать источник
Прашант Кишор обещал обеспечить бедным 5 кг пайка и превратит свой депутатский дом в общественный офис
Депутат Банкипура Прашант Кишор пообещал жителям полное распределение 5 кг продовольствия и завершил, что в его округе не будет взяток. Он также заявил о планах использовать свое государственное жилье в Патне как открытый офис для приема граждан и трудоустройства 10 тысяч молодых людей.
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Prashant Koshor: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर बांकीपुर के विभिन्न वार्डों में जनसंपर्क कर रहे हैं। आभार सभा में उन्होंने वादा किया कि किसी काम में भ्रष्टाचार नहीं होगा। उन्होंने अगले तीन महीनों में गरीबों को पूरा 5 किलो राशन दिलाने का आश्वासन दिया और स्थानीय समस्याओं के समाधान की बात कही।
पटना: जन सुराज के सूत्रधार और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर आजकल अपने क्षेत्र के सभी वार्डों में लोगों से मिल रहे हैं। अपनी प्रायोरिटी बता रहे हैं। बोरिंग कैनाल रोड और मीठापुर में आभार सभा की। जहां उन्होंने कहा कि मैंने वादा किया था कि विधायक या विधायक से संबंधित किसी भी काम में एक रुपए की चोरी नहीं होने देंगे। ये वादा हर हाल में निभाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अगले तीन महीने में पांच किलो पूरा अनाज मिलने लगेगा। इसमें करीब 30 परसेंट(6 से 8 रुपये) की चोरी होती है। जो राजनेताओं से लेकर अधिकारियों के बीच बंटती है। इसलिए लोगों को 5 किलो की जगह 4 किलो ही अनाज मिलता है। बांकीपुर के गरीबों को 5 किलो अनाज मिलना सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने लोगों से उनके इलाके की समस्याओं से अवगत कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नगर निगम से लेकर ट्रैफिक पुलिस तक की समस्या का समाधान होगा।
बांकीपुर में अपनी वादों को याद दिला रहे प्रशांत
प्रशांत किशोर ने उन्होंने कहा कि अगले 3 महीने में बांकीपुर में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र का कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं बचेगा जिसको 1100 की पेंशन नहीं मिले। मार्च 2027 तक बांकीपुर में प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को आर्थिक राहत मिले इसके लिए प्रयास हो रहा है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव जीतने के बाद, जन सुराज के संस्थापक और नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर ने अपने आवंटित सरकारी आवास का इस्तेमाल निजी घर के तौर पर न करने का फैसला किया है।
मैंने वादा किया था कि विधायक या विधायक से संबंधित किसी भी काम में एक रुपए की चोरी नहीं होने देंगे। ये वादा हर हाल में निभाया जाएगा।
प्रशांत किशोर
वे पटना के वीआईपी एमएलए हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में मौजूद दो मंजिला डुप्लेक्स, यानी विधानसभा आवास नंबर 182 को बांकीपुर के लोगों के लिए एक पब्लिक ऑफिस में बदलना चाहते हैं। किशोर का कहना है कि यह आवास एक ऐसी जगह होनी चाहिए जहां लोग अपनी समस्याओं, शिकायतों और सुझावों के साथ सीधे अपने चुने हुए प्रतिनिधि से मिल सकें। उन्होंने कहा कि यह ऑफिस आम जनता के लिए खुला रहेगा ताकि उन्हें अपनी समस्याओं के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े।
सरकार आवास सभी के लिए रहे हमेशा खुला- पीके
उनके मुताबिक, इस पहल का मकसद विधायक और उनके क्षेत्र के लोगों के बीच सीधा संवाद कायम करना है। बांकीपुर के लोग स्थानीय विकास, सरकारी सेवाओं और जनता से जुड़े अन्य मुद्दों को उठाने के लिए इस आवास पर आ सकेंगे। बांकीपुर के लिए किशोर की योजनाओं में रोजगार एक और अहम हिस्सा है। उन्होंने क्षेत्र के 10,000 युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने में मदद करने का लक्ष्य रखा है। आवास नंबर 182 पर एक ऐसा सिस्टम बनाया जा रहा है जहां पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा अपना बायोडाटा जमा कर सकें। इसके बाद एक खास टीम उम्मीदवारों की योग्यता और प्रोफाइल के आधार पर उन्हें सही मौकों से जोड़ने का काम करेगी।
10,000 युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी दिलाने में मदद करने का लक्ष्य रखा है। आवास नंबर 182 पर एक ऐसा सिस्टम बनाया जा रहा है जहां पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा अपना बायोडाटा जमा कर सकें।
प्रशांत किशोर
यह सरकारी आवास पटना के वीआईपी एमएलए हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में स्थित है। कैबिनेट मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राम कृपाल यादव का आवास भी बगल में ही है। सरकारी आवास को निजी घर के बजाय जनता के लिए खुले ऑफिस के तौर पर इस्तेमाल करने के प्रशांत किशोर के फैसले ने काफी ध्यान खींचा है।
इस कदम को किशोर की राजनीतिक सोच को असलियत में बदलने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। सरकार से मिले आवास को मुख्य रूप से निजी सुविधा के तौर पर इस्तेमाल करने के बजाय, वे चाहते हैं कि यह विधायक और जनता के बीच संपर्क का एक सुलभ जरिया बने।
इनपुट- एजेंसी
लेखक के बारे मेंसुनील पाण्डेयसुनील पाण्डेय, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में बतौर सीनियर जर्नलिस्ट कार्यरत हैं। जनवरी 2021 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप का हिस्सा बने सुनील वर्तमान में NBT ऑनलाइन की बिहार-झारखंड टीम में संपादकीय और रिपोर्टिंग में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रणनीतिक न्यूज़ प्लानिंग, सटीक संपादन और धारदार ग्राउंड रिपोर्टिंग उनकी विशेष पहचान है। राजनीति और व्हाइट कॉलर करप्शन जैसे विषयों पर गहरी पकड़ रखने वाले सुनील ने 2005 से शुरू हुए अपने करियर में कई बड़ी खबरें ब्रेक की हैं। जी20 शिखर सम्मेलन (G20 Summit) से लेकर केरल तक के चुनावी बयार को समझा। दिल्ली, बिहार और तेलंगाना में पत्रकारिता के विभिन्न आयामों को अनुभव करने वाले सुनील सोशल मीडिया एक्स (पहले ट्विटर) पर @sunilpandeyjee के जरिए सक्रिय रहते हैं।
सुनील का पत्रकारिता करियर प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग अनुभवों से समृद्ध है, जहां उन्होंने संपादन और ग्राउंड रिपोर्टिंग की महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। पटना, दिल्ली और हैदराबाद जैसे महानगरों में उन्होंने कई प्रतिष्ठित हस्तियों का साक्षात्कार किया है। उनकी ग्राउंड रिपोर्ट्स का प्रभाव इतना गहरा रहा है कि कई मौकों पर सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने और उनमें सुधार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सुनील पाण्डेय की पारखी नजर राजनीतिक उतार-चढ़ाव और सरकारी नीतियों के आम आदमी पर पड़ने वाले असर के विश्लेषण पर रहता है। डिजिटल युग की मांग को समझते हुए वे अपनी लेखनी और वीडियो, दोनों माध्यमों से नवभारत टाइम्स के पाठकों से जुड़ते हैं। उनमें किसी भी सामान्य खबर को राष्ट्रीय विमर्श (National Narrative) बनाने की अद्भुत क्षमता है। वे केवल समाचार देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खबर के पीछे के नैतिक मूल्यों और उसके व्यापक प्रभाव को गहराई से परखते हैं।
अपने पत्रकारिता सफर का आगाज सुनील ने प्रतिष्ठित पाक्षिक पत्रिका 'माया' से किया, जिसके बाद उन्होंने विभिन्न समाचार पत्रों के लिए स्वतंत्र स्तंभकार (कॉलमनिस्ट) के रूप में अपनी लेखनी को धार दी। ETV न्यूज की संपादकीय टीम के साथ संपादन और रिपोर्टिंग के गुर सीखने के बाद, उन्होंने ज़ी मीडिया और नेटवर्क 18 जैसे बड़े संस्थानों में एक लंबा समय बिताया। प्रिंट और टीवी न्यूज़ के व्यापक अनुभव के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया। न्यूज़ इकोसिस्टम की गहरी समझ विकसित की। वर्तमान में वे टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के डिजिटल प्लेटफॉर्म 'नवभारत टाइम्स ऑनलाइन' में अपनी धारदार पत्रकारिता को जारी रखे हुए हैं।
सुनील पाण्डेय की शैक्षणिक नींव 'पूरब का ऑक्सफोर्ड' माने जाने वाले पटना विश्वविद्यालय में पड़ी। यहां से ग्रेजुएशन और मास्टर के साथ ही उन्होंने पत्रकारिता की डिग्री भी प्राप्त की। वे समाचारों के विभिन्न स्रोतों के विश्लेषणात्मक अध्ययन और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों जैसे गंभीर विषयों पर अपनी लेखनी और व्याख्यानों के माध्यम से निरंतर विचार साझा करते रहते हैं। पत्रकारिता करियर के दौरान कई अवॉर्ड से सुनील पाण्डेय को सम्मानित किया जा चुका है।... और पढ़ें
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