Хинди Наука и Образование
06.07.2026 Читать источник
Инфлюенсер доказал, что кожура банана выдерживает нагрев до 1300 градусов
Индийский блогер Ашу Гхай провел эксперимент, в ходе которого обжигал кожуру банана при температуре 1300 градусов Цельсия. Несмотря на экстремальное воздействие огня, фрукт остался целым благодаря способности кожуры поглощать тепло и образовывать защитный слой.
Перевод ИИ
Текст статьи доступен на языке оригинала.
Нажмите кнопку «Перевести статью» выше, чтобы сгенерировать перевод с помощью ИИ.
Оригинальный контент
Banana Burning Experiment: क्या केले में आग लगाई जाए, तो वो जल जाएगा? कभी आपके मन में भी अगर ये अतरंगी सवाला आया है, तो इसका जवाब एक इंफ्लूएंसर ने ढूंढ निकाला। आशु घई ने एक केले को 1300 डिग्री सेल्सियस में तपाया। मगर तपाने के बाद जब उन्होंने छिलका हटाया तो नतीजा उम्मीद से बिल्कुल अलग था।
केला खाना सबसे आसान होता है। बस छिलका छीला और खा लिया। लेकिन क्या केले का छिलका Fire Resistant होता है यानि वो आग को रोक सकता है? आशु घाई ने केले के साथ एक्सपेरीटमेंट किया है, जिसमें उन्होंने केले को 1300 डिग्री की आग में तपाया है। मगर जब उन्होंने उसे छीला तो वह चौंक गए।
केला आग से जलता है?
केले के छिलके को आशु 1300 डिग्री की हीट पर गर्म करते हैं। वीडियो में लगभग 30 सेकंड तक वो लगातार केले के छिलके को आग में तपा रहे होते हैं। मगर जब एक्सपेरीमेंट पूरा करने के बाद जब वो केले से छिलका हटाते है, तो केला बिल्कुल सही सलामत नजर आता है। अब हो सकता है कि वो गर्म हुआ हो, लेकिन जला हुआ बिल्कुल भी नजर नहीं आता।
केला 1300 डिग्री पर भी क्यों नही जला?
इस बारे में आशु बताते हैं कि ‘केले के छिलके नेचुरली गर्मी को रोकने वाले (thermal insulators) होते हैं। इनमें 80% से ज्यादा पानी और रेशेदार, स्पंजी परत होती है। छिलका गर्मी को सोख लेता है और एक ‘चार बैरियर’ (char barrier) बनाता है, जो हीट की एनर्जी को फल तक पहुंचने से रोकता है। कुदरत की इंजीनियरिंग ही कुछ अलग है!’
आशु घई (@ashu.ghai) की इस वायरल वीडियो को इंटरनेट पर 45 लाख से अधिक बार देखा गया है। जबकि देखने वालों ने इसे 1 लाख 26 हजार लाइक्स भी दिए है।
फायर ब्रिगेड का ड्रेस?
यूजर्स कमेंट सेक्शन में इस एक्सपेरीमेंट को देखने के बाद अनोखी प्रतिक्रिया देते नजर आ रहे हैं। एक ने लिखा कि ‘फायर ब्रिगेड का सूट इसे बनवा दो सर।’ दूसरे यूजर ने पूछा कि क्या केले का छिलका पहनकर हम सूरज में निकल सकते हैं। तीसरे यूजर का कहना था कि अगर 5 मिनट तक इसे गर्म किया गया तो छिलका नहीं रोक पाएगा। चौथे यूजर का कमेंट था कि ये एक ट्रेंडिंग एक्सपेरीमेंट है।
केला क्यों नहीं जला?
केले में 70-75 प्रतिशत पानी होता है।
अगर आप केले को जलाते है, तो पहले बहुत सारी एनर्जी पानी को गर्म करके भाप बनाने में लग जाएगा।
वह पहले काला पड़ेगा, फिर सिकुड़ेगा, सूखेगा और धीरे-धीरे कार्बनाइज होता है।
अगर 2-3 मिनट तक लगातार इस एक्सपेरीमेंट को जारी रखा गया तो केला जल भी सकता है। हालांकि, थोड़ी देर के एक्सपेरीमेंट में ऐसा नहीं होगा।
लेखक के बारे मेंप्रखर पाण्डेयप्रखर पाण्डेय नवभारतटाइम्स.कॉम में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं और पिछले 3.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वायरल जर्नलिज्म में विशेषज्ञता रखने वाले प्रखर ने अब तक 3100 से अधिक लेख लिखे हैं। वह सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X/Twitter, Reddit, Threads और Facebook) की नब्ज पहचानने में माहिर हैं। प्रखर की विशेषता केवल ट्रेंड्स को पकड़ना ही नहीं, बल्कि इंडियन रेलवे और ट्रेन यात्राओं से जुड़ी ऐसी 'फ्रेश' और 'यूनिक' खबरें सामने लाना है, जो सीधे आम आदमी के जीवन को प्रभावित करती हैं।
प्रखर मानते हैं कि 'वायरल' होने का अर्थ केवल सनसनी फैलाना नहीं, बल्कि कंटेंट की गहराई और उसकी प्रमाणिकता सुनिश्चित करना है। यही कारण है कि वे किसी भी सोशल मीडिया स्टोरी को पब्लिश करने से पहले मूल सोर्स या पोस्ट करने वाले व्यक्ति से संपर्क कर उसकी सत्यता की जांच करते हैं। साल 2025 में उनके द्वारा कवर की गई 'ढाबे पर फौजियों' की कहानी इसका प्रमाण है, जिसने न केवल लोगों को दिल जीता, बल्कि अपनी विश्वसनीयता के कारण सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना भी पाई।
एक Gen-Z लेखक होने के नाते प्रखर को आज की युवा पीढ़ी की पसंद और डिजिटल व्यवहार की गहरी समझ है। वे वायरल कंटेंट के 'हल्केपन' को कम करने के लिए उसमें मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सीख को पिरोते हैं, ताकि पाठक केवल खबर न पढ़ें, बल्कि उससे जुड़ाव महसूस करें। मनोरंजन, खेल और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर उनकी पैनी नजर उनके लेखों को अधिक सूचनात्मक और ट्रेंडी बनाती है।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो प्रखर ने फिल्म सिटी स्थित गुलशन कुमार जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट (नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त) से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में BA किया है। इसके अलावा, उन्होंने प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय, प्रयागराज से राजनीति विज्ञान में MA की डिग्री हासिल की है। यह शैक्षणिक आधार उन्हें खबरों को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से समझने में मदद करता है।
नवभारत टाइम्स के साथ जुड़ने से पहले, प्रखर ने करीब पौने दो साल जागरण.कॉम में अपना योगदान दिया था, जहां उन्होंने स्पोर्ट्स, एस्ट्रो और लाइफस्टाइल जैसी विभिन्न बीट्स पर हजारों वेब स्टोरीज कवर कीं। प्रखर का उद्देश्य जटिल से जटिल खबर को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है, ताकि वह हर आम आदमी के लिए उपयोगी साबित हो सके।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Viralकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Аналитика ИИ и парсинга
Технические детали обнаружения, сопоставления и связывания статьи
Поисковый запрос
«эксперимент сжигание банана 1300 градусов индийский блогер»
Запрос, сгенерированный ИИ для поиска статьи в веб-источниках
Связанные результаты поиска
Результаты поиска отсутствуют в БД
Парсер не сохранил результаты веб-поиска для этой статьи.